Dhandhanwali Ki Amar Gatha
Bhajan

Dhandhanwali Ki Amar Gatha

Saurabh Keshav Madhukar

Dhandhanwali Ki Amar Gatha Lyrics

Synced

दरबार अनोखा सरकार अनोखी

मैं खो जाता हूँ, श्रृंगार में इनके

बातें क्या मन की, मैया मन ही चुरावे

ले नाम दादी का, माँ पार लगाये

देखा है बदलती, किस्मत की रेखा

सौरभ मधुकर को यो पैगाम घर घर गूंजे दादी को नाम

अपने भगतों की रक्षा करने वाली माँ टीडा-गेला के स्वरणिम इतिहास को

आप सभी भगतों के समक्ष प्रस्तुत करने का एक छोटा सा प्रयास किया गया है,जय दादी की

भगतों की रक्षा करती माँ ढ़ाँढ़ण वाली जी ,माँ ढ़ाँढ़ण वाली जी

ध्यान लगा कर सुनो सुनाऊँ कथा निराली जी,पावन कथा निराली जी

ध्यान लगा कर सुनो सुनाऊँ कथा निराली जी,पावन कथा निराली जी

इनकी चार संतान थे जिसमें दो पुत्र और दो पुत्री थी

जोखिराम जी भोलानाथ जी टीडा-गेला उनका नाम गऊओं की सेवा करणी यो भोलानाथ जी को थो काम

ध्यान लगा कर सुनो सुनाऊँ कथा निराली जी,पावन कथा निराली जी

ध्यान लगा कर सुनो सुनाऊँ कथा निराली जी,पावन कथा निराली जी

माता पिता के स्वर्गवास के पश्चात समय चक्र बीतता हे

विधि विधान के लेखानुसार एक दिन अचानक भोला जी को

एक दिन भोला नाथजी को जंगल मैं डस लियो विषधर ने

आये अचानक काल ने घेरो खबर फैल गई घर घर में

उनकी बहने टीडा गेला को यह खबर जैसे ही लगती है वो रोती बिलखती दौड़ी आती हे

दोनू बहना व्याकुल हो गई केयो विधाता यो के हुयो

प्राणा से प्यारे भाई ने क्यूँ म्हारे से छीन लियो

एक पलक भी बिन भाई के,एक पलक बिन भाई के ना जीने वाली जी,ना जीने वाली जी

श्री टीडा गेला को अपने सतित्व का आभास हुआ उन्होंने समस्त ग्राम

वाशियों के समक्ष अपने भोला भैया के संग शक्ति होने का दृढ़ निश्चय किया

म्हे दोनों बेहना भी इब सागा भाई के जावाँगा

बहन भाई के नाते ने मैं जग में अमर करावांगा

दोनू बहना बैठ चिता पर सत की जोत जगाई टीडा गेला दादी हो गई जोत मैं जोत समाई

दादी के सत की गाथा,दादी के सत की गाथा,ना भूलने वाली जी ना भूलने वाली जी

ध्यान लगा कर सुनो सुनाऊँ कथा निराली जी,पावन कथा निराली जी

भगतों की रक्षा करती माँ ढ़ाँढ़ण वाली जी ,माँ ढ़ाँढ़ण वाली जी

श्री दादी जी का मंड सीसवाल मैं तैयार किया गया

परंतु अपने अपने व्यवसाय के कारण माँ के भगत फतेपुर सहर मैं जाकर बस गए

फतेहपुर से दादी के दर्शन हेतु सीसवाल के रास्ते मैं उन्हें बहुत कठिनाई होती थी

भक्तों ने दादी से अरज करी की हे दादी हम सभी आपके मंदिर की स्थापना फतेहपुर मैं कराना चाहते हैं

दादी हम सभी आपके मन्त्र की अस्थापना फतेहपुर मैं कराना चाहते हैं

दादी ने भगतों की प्रार्थना स्वीकार की तथा आदेश दिया

सुपणे मैं दादी जी बोल्या मंड सू थे ईंटा ले ल्यो

जठे चाहो मंदिर बनवानो बठे ही ये ईंटा मेलो

दादी के मंड के इंटों को लिये ढ़ाँढ़ण गाँव में लघु शंका के कारण उन्होंने ईंटो को वंही रख दिया

ईंटा ने जद उठान लाग्या

तिल भर भी ना उठ पाई ध्यान करो जद दादी जी को सारी बात समझ आई

तब सु कुहावन लागी मैया,तब सु कुहावन लागी मैया ढ़ाँढ़णवाली जी दादी ढ़ाँढ़णवाली जी

भक्त इस प्रकार दादी टीडा गेला माँ ढ़ाँढ़णवाली के नाम से विख्यात हुई

छोटा सा ढ़ाँढ़ण गाँव अब ढ़ाँढ़ण धाम के रूप मैं परिवर्तित हो चुका था

फिर क्या था दादी की पूजा अर्चना के लिये साल दर साल भगतों की भीड़ बढ़ने लगी

भादी अमावस ने ढ़ाँढ़ण में मेलो लागै भारी दूर दूर से दर्शन करने आवे नर और नारी

मेलो लागै भारी दूर दूर से दर्शन करने आवे नर और नारी

ताराचंद भी सेवक माँ थारो गुण गान करे

सौरभ मधुकर टाबरिया माँ निशदिन ध्यान धरें

थारे नाम की मैया मन में,थारे नाम की मैया मन में ज्योत जगा ली जी ,मन में ज्योत जगा ली जी

जाल जाल जाल जाल

जय माँ ढ़ाँढ़णवाली की ,

भगतों की रक्षा करती माँ ढ़ाँढ़ण वाली जी ,माँ ढ़ाँढ़ण वाली जी

ध्यान लगा कर सुनो सुनाऊँ कथा निराली जी,पावन कथा निराली जी

म्हारी माँ ढ़ाँढ़णवाली दादी ढ़ाँढ़णवाली,म्हारी माँ ढ़ाँढ़णवाली दादी ढ़ाँढ़णवाली

हिसार जिला के सीसवाल में बालचंद्रजी रहा करे,धर्म पत्नी थी पुर्णी देवी,दान पुण्य नित किया करे

कमी नहीं कोई बात की घर में ,कमी नहीं कोई बात की घर में थी खुशहाली जी , घर में थी खुशहाली जी

म्हारी माँ ढ़ाँढ़णवाली दादी ढ़ाँढ़णवाली,म्हारी माँ ढ़ाँढ़णवाली दादी ढ़ाँढ़णवाली

ध्यान लगा कर सुनो सुनाऊँ कथा निराली जी,पावन कथा निराली जी

म्हारी माँ ढ़ाँढ़णवाली दादी ढ़ाँढ़णवाली,म्हारी माँ ढ़ाँढ़णवाली दादी ढ़ाँढ़णवाली

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