Jaha Laxminath Baba Ka Mandir
Unknown Artist
Jaha Laxminath Baba Ka Mandir
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Jaha Laxminath Baba Ka Mandir Lyrics
यह त्रिभुवन से है न्यारी
जहाँ तुलसी चंदन और केशर के बाग, बगीचे न्यारे
जहाँ घंटा टाल और नौबत बाजे, गगन गूंजते नगाड़े
इस मंदिर की सुंदरता पर है स्वर्गभूमि भी बारी
जहाँ बना शिवालय आसमान से करता रहता बातें
यहाँ लाखो नर-नारी देते है गठजोड़े की जाते
जहाँ दीप कतारो से पूजा और गंगाजल की झारी
यहाँ पूरब में श्री सारनाथ का गगन चुमता मंदिर
यहाँ दक्षिण में श्री बुद्धगिरीजी हिग्लांज देवी है अन्दर
यहाँ उत्तर में श्री अृमतनाथ भक्तों की विपदाटारी
जहाँ पंचमुखी बालाजी हमने अपनी आँखों देखा
जहाँ माता सीता के दर्शन है और लक्ष्मण की रेखा
जहाँ व्यास कवि कथ मंगल गाये, प्रभु की लीला न्यारी
जहाँ लक्ष्मीनाथ प्रभु का मंदिर वो पावन भुमि हमारी
राजा राम राजा राम
और लक्ष्मण की रेखा
जहाँ खेमराज और गेपी गावे मनीराम बलिहारी
यहाँ दो जाटी बालाजी का धाम है स्वर्ग से प्यारा
यहां प्रभु विपर को हमने देखा अपना हाथ संवारा
राजा राम राजा राम
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About this Bhajan
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