Mhare Sir Pe Hai Dadi Ji Ro Hath
Bhajan

Mhare Sir Pe Hai Dadi Ji Ro Hath

Vikas Sharma

Mhare Sir Pe Hai Dadi Ji Ro Hath Lyrics

Synced

जे कोई माहरी मैया जी ने सांचे मन से ध्यावे

काल कपाल भी मैया जी के भगता से गबरावे

जो माँ पे विश्वाश करे वो घुटी तान के सोहे

बठे प्रवेश करे न कोई बाल न बांको हॉवे

जानके मन में नहीं है विश्वाश विको तो मैया कोई कर सी

कलयुग माहि ताहियाँ मियां महारी साँची नाम कमाई

जब जब भीड़ पड़ी भगता पे दौड़ी दौड़ी आई

या तो घट घट की जाने सारी बात कोई तो माहरो ताहि कर सी

म्हे तो पकड़ के बैठ्या म्हारी झूझनवाली मैया रो हाथ

म्हारे सिर पे है दादीजी को हाथ म्हारो तो कोई काई करसी

जे कोई सांचे मन से माहरी दादीजी ने ध्यावे

काल कपाल भी दादी जी के भगता से गबरावे

म्हारो तो कोई काई करसी

जो माँ पे विश्वाश करे वो खूटी तान के सोहे

म्हे तो चाला हा जी म्हारी झुंझनवाली मैया रे लार

जे कोई माहरी दादीजी के धोक लगावन आवे

खाली झोली लावे हर कोई भर भर झोली जावे

म्हे तो आया हा जी म्हारी झुंझनवाली मैया रे द्वार

म्हारो तो कोई काई करसी

ओ जबसे सौपी है थाने पतवार, दादीजी म्हे तो मौज करा

म्हारे सिर पे है दादीजी को हाथ दादीजी म्हे तो मौज करा

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