Shri Dhandhan Sati Dadi Chalisa
Bhajan

Shri Dhandhan Sati Dadi Chalisa

Raju Mehra

Shri Dhandhan Sati Dadi Chalisa Lyrics

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नमो नमो गुरु देव को, धरूँ गणेश का ध्यान

वाणी देवो सरस्वती, करूँ मात गुण गान

जय जय जय माँ ढ़ाँढ़णवाली

दिव्य तेज माँ ज्योति निराली

टिडा गेला नाम तिहारो

सकल मनोरथ पूरण वारो

बालचन्द्र थे जनक तिहारे

धर्म परायण के थे प्यारे

पूरणी देवी तुम्हारी माता

जन्मे दो बहने दो भ्राता

बड़े भाई थे जोखीरामजी

उनसे छोटे भोलेनाथजी

भोलेनाथजी वन में जाते

निशदिन वे गायों को चराते

स्वर्ग सिधार गये वो अचानक

बहनों का दिल करे धकाधक

दोनों बहने गाँव में जाकर

सबको कहने लगी बुलाकर

मानो तुम सब हमरा कहना

बोलो रे भाई सब संतन की जय

दोनों बहने बैठी खिलकर

गोद में लीना भाई को जब

देखा अनुपम दृश्य वहाँ तब

तप प्रताप से प्रगटी ज्वाला

चारों तरफ हो गया उजाला

हो गये पूरे आपके सपने

लगे राम नाम को जपने

वेद पुराण उपनिषद गावै

कोटी कंठ जयकार सुनावै

तुम्हरो ध्यान धरै जो कोई

मन वांछित फल पावै सोई

लाल चुनड़िया तन पै सोहै

निर्मल कान्ति जगत मन मोहे

अटल छत्र की अदभुत माया

जय जयकार जगत में छाया

कर कृपाण त्रिशुल विराजे

विक्रम रूप आपको साजै

गल मोतियन की माल विराजे

देख श्रृंगार रति अति लाजै

झालर शंख नगाड़ा बाजै

जिसको सुण पातक सब भाजै

रतन सिंहासन झलके नीको

पल धिन-धिन ध्यान दादी को

तू जगदम्बे तू रूद्राणी

तू ही शारदा अरु ब्रह्माणी

नैया डगमग डोले मेरी

आशा तेरी मुझे घनेरी

खेवन हार तुम्हीं हो मैया

पार लगायो मेरी नैया

मैं हूँ बालक भोला भाला

थाँ बिन कुणे मेरा रखवाला

जिसके मन में बास तुम्हारा

भरा रहे उसका भण्डारा

भादव में थारों मेलो लागै

आते सब परिवार के सागै

अन्धे जन जो ध्यान लगावे

खुलते नयने न मोद समाये

नाचत गावत मन्दिर आवै

दर्शन पाय महासुख पावै

खीर पूड़ा का भोग लगावै

श्रीफल मेवा भेंट चढ़ावै

महिषासुर से दानव मारे

तुमने शुम्भ-निशुम्भ पछाड़े

जो नर आवे शरण तुम्हारी

जिनकी करो सदा रखवारी

भीड़ पड़े दर्शन की भारी

जय जयकार करे नर नारी

जिसने मात स्वरूप निहारा

उसका भय से हुआ किनारा

जग में प्रबल तुम्हारी माया

तुमने ही यह विश्व रचाया

मैया हम हैं तेरे बालक

तुम हो मां सबकी प्रतिपालक

मात मात सुमिरहुं दिन-राती

शाम दुपहरी और प्रभाती

मैं अबोध मूरख अज्ञानी

आया तेरी शरण भवानी

मंगल पाठ जो नर गावै

मन के कष्ट दूर हो जावै

'साँवर' 'बजरंग' की यह विनती

दूर करो माँ सबकी विपत्ति

दादीजी का मंगलपाठ

नित्य करे जो पाठ

अन्न धन का घाटा नहीं

सदा रहेगा ठाठ

जय अम्बे माँ जगदंबे

अम्मे आज अप्रदंदे

जय अम्बे माँ जगदंबे

चक्र धन्धे जै अम्मे

जय अम्बे माँ जगदंबे

जै अम्मे मा

जय अम्बे माँ जगदंबे

प्रथम गौरीसुत गणपति का मन मैं धरु ध्यान

माँ ढ़ाँढ़णवाली के चरित्र का सुंदर करूँ बखान

मात शारदे कृपा करो, बुद्धि करो प्रदान

आस मेरी पुरण करो, दे सुंदर वरदान

जय अम्बे माँ जगदंबे

जय अम्बे माँ जगदंबे

जय अम्बे माँ जगदंबे

जय अम्बे माँ जगदंबे

जय अम्बे माँ जगदंबे

जय अम्बे माँ जगदंबे

जय अम्बे माँ जगदंबे

दादी होवेंगी दोनों बहनां

चिता बनाई सबने मिलकर

जय अम्बे माँ जगदंबे

जय अम्बे माँ जगदंबे

जय अम्बे माँ जगदंबे

जय अम्बे माँ जगदंबे

जय अम्बे माँ जगदंबे

जय अम्बे माँ जगदंबे

जय अम्बे माँ जगदंबे

जय अम्बे माँ जगदंबे

जय अम्बे माँ जगदंबे

जय अम्बे माँ जगदंबे

जय अम्बे माँ जगदंबे

जय अम्बे माँ जगदंबे

जय अम्बे माँ जगदंबे

जय अम्बे माँ जगदंबे

जय अम्बे माँ जगदंबे

जय अम्बे माँ जगदंबे

जय अम्बे माँ जगदंबे

जय अम्बे माँ जगदंबे

जय अम्बे माँ जगदंबे

जय अम्बे माँ जगदंबे

जय अम्बे माँ जगदंबे

जय अम्बे माँ जगदंबे

जय अम्बे माँ जगदंबे

जय अम्बे माँ जगदंबे

जय अम्बे माँ जगदंबे

जय अम्बे माँ जगदंबे

जय अम्बे माँ जगदंबे

बोलो रे भाई ढ़ाँढ़णवाली की जय

बोलो रे टीडाा गेला की जय

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